6.6 Real Estate Investment: Residential vs Commercial
6.6 Real Estate Investment: Residential vs Commercial
🎯 इस सबक का मक़सद (Learning Objectives)
- रियल एस्टेट में रेंटल यील्ड (Rental Yield ~2-3%) का असली गणित समझना।
- 20 साल के भारी होम लोन और उसकी कुल ब्याज लागत की गणना करना।
- रहने के लिए घर (Self-occupied) और निवेश के लिए प्रॉपर्टी का अंतर जानना।
💡 रोज़मर्रा की ज़िंदगी की मिसाल (Real-Life Analogy)
अगर आप ₹1 करोड़ की लागत से एक दुकान खोलते हैं और उस दुकान से हर महीने सिर्फ ₹18,000 की कमाई होती है (यानी साल का ₹2.16 लाख या 2.16%), और उस दुकान के लिए आपने 8.5% ब्याज पर लोन लिया है, तो आप हर महीने घाटे में चल रहे हैं। भारत के बड़े शहरों में रेजिडेंशियल फ्लैट्स का यही कड़वा सच है।
📊 रेजिडेंशियल फ्लैट्स का गणित (रेंटल यील्ड)
$$ ext{Rental Yield (%)} = rac{ ext{सालाना कुल किराया}}{ ext{प्रॉपर्टी की कुल बाज़ार कीमत}} imes 100 $$
- रेजिडेंशियल फ्लैट्स: रेंटल यील्ड सिर्फ 2% से 3% (सोसाइटी मेंटेनेंस और प्रॉपर्टी टैक्स काटने के बाद यह 1.5% रह जाती है)।
- कमर्शियल प्रॉपर्टी (दुकान/ऑफिस): रेंटल यील्ड 6% से 8% (काफी बेहतर)।
- प्लॉट / ज़मीन: कोई रेंटल यील्ड नहीं, लेकिन लंबे समय में कैपिटल एप्रिसिएशन सबसे तेज़।
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